किसान और रहस्यमय मटका /Kishaan or rahsymay matka ki kahani


 एक समय की बात है मगधपुर नामक गांव में एक मेहनती किसान रहता था। दिन रात सर्दी हो चाहें गर्मी हो अपने कार्य में लगा रहता था। उसकी इतनी मेहनत के बाद भी फसल शुरुआत में तो अच्छी होती थी लेकिन काफी बार मौसम खराब के कारण उसकी फसल नष्ट हो जाती थी।


उसके परिवार में पांच सदस्य थे सबका भरण पोषण करना अब उसके लिए बहुत कठिन हो गया। घर पर उसकी पत्नी की तबीयत ठीक नहीं रहती थी। किस कारण वो कमाने के लिए शहर भी नहीं जा पा रहा था।उसके बच्चे भी छोटे थे जो उसके पत्नी की देखभाल नहीं कर पा रहे थे।


समय के साथ-साथ उसकी पत्नी की तबीयत और खराब होने लग गई। पत्नी के इलाज के लिए अब उसके पास पैसे भी बहुत कम थे। अपनी मां की तबीयत खराब देखकर उसके छोटे-छोटे बच्चों ने भगवान से प्रार्थना की उसकी मां जल्द ठीक हो जाए। एक दिन शाम के समय किसान खेत में हल जोत रहा था  तभी हल जोतते समय उसका हल खेत के बीच में बहुत गहरा चला गया तभी हल आगे वाला हिस्सा कहीं फस गया।


बेल अब आगे नहीं बढ़ पा रहे थे किसान ने बैलों को हल से अलग किया और फिर जमीन में फसे हल को निकालने के लिए वहां से फावड़ा से मिट्टी हटाना शुरू किया। काफी मीट्टी  हट जाने के बाद उसने देखा कि हल का आगे वाला सिरा एक लोहे के मटके में अटका हुआ था। 

फिर उसने हल को बाहर निकाला और मटके को भी बाहर ले लिया। उसने मटके में से सारी मिट्टी हटाई लेकिन मटका तो खाली था। वह अब वापस खेत जोतने लगा फिर शाम को मटका लेकर घर चला गया। शाम का वक्त था वह वह वही लोहे का मटका लेकर गाय का दूध निकालने चला गया।


 गाय का दूध निकालने के बाद वह दूध से भरा मटका लेकर रसोई में चला गया। अब वह दूध गर्म करने के लिए उस मटके में से दूध को किसी और बर्तन में डालता है। लेकिन उसे मटक में से दूध तो खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा था। यह सब देखकर किसान की आंखें फटी की फटी रह गई। एक के बाद एक सारे बर्तन दूध से भरते चले गए लेकिन वह मटका खाली नहीं हुआ।


अब वह किसान जान गया कि यह एक जादुई मटका है। किसान के चेहरे पर बहुत खुशी छा गई।वह मटका वही रसोई में रखकर तुरंत अपनी पत्नी के पास दौड़ा चला जाता है और सारी बात अपनी पत्नी को बताता है।


उसकी पत्नी और बच्चों ने यह सब सुना तब उन्होंने भगवान का शुक्रिया अदा किया। अब किसान अब उस मटके की सहायता से रोज दूध के बर्तन भरता था और ढेर सारा दूध इकट्ठा करके बाजार में बेचने चला जाता था।


रोज दूध बेचकर अच्छे पैसे आने लगे तब किसान की आर्थिक स्थिति अब मजबूत हो गई। अब उसने पैसों से अपनी पत्नी का इलाज करवाया और पत्नी बिल्कुल अच्छी तरह स्वस्थ हो गई,अब घर में सब सुख संपत्ति के साधन हो गए।


अब दूध बेचकर जो पैसे आते हैं उसमें से कुछ पैसों से वह गरीब परिवारों की आर्थिक सहायता करने में मदद करता है। वह किसान मेहनती तो था ही साथ में ईमानदार व परोपकारी भी था। वह हमेशा सबका भला सोचता था इसलिए शायद भगवान ने उसके इसी गुणों के कारण किसान की इस तरीके से सहायता की  है। 


 इसलिए कहा जाता है जीवन में चाहे कितनी भी मुसीबत आ जाए पर अपने कर्तव्य पालन से कभी नहीं हटना चाहिये और निस्वार्थ भाव से अपने कार्य में लगे रहना चाहिए। ऐसा करने पर भगवान भी उनके साथ होते हैं।


 दोस्तों हमारी यह कहानी आपको कैसी लगी कमेंट में जरूर बताना। अगर अच्छी लगी तो लाइक और शेयर जरूर करना। इसी तरह और भी रोमांचक और अच्छी-अच्छी कहानियां लाता रहूंगा।

 धन्यवाद।

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