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बुद्धिमता और बल की परीक्षा

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  एक गांव में माधव, अभिमन्यु नाम के दो मित्र रहते थे। दोनों में अलग-अलग काबिलयत थी।माधव बहुत ही बुद्धिमान था।अभिमन्यु बहुत ही बलवान था। दोनों अपनी अपनी खूबी में माहिर थे। एक दिन की बात हैं उस गाँव में एक दिव्य संत आये और थोड़े दिन भजन कीर्तन करने के लिए रुके थे। एक दिन गाँव में किसी से जब संत ने इन दोनों मित्रो के बारे में सुना तब उन्होने उनकी परीक्षा लेने का विचार किया।  संत ने उन दोनों मित्रो को अगले दिन अपने आश्रम में प्रसादी में आने को कहा। दोनों मित्र बहुत खुश हुए की एक महान संत ने हमें बुलाया हैं।हमारा सौभाग्य हैं की प्रसादी के अलावा सेवा करने का भी मौका मिलेगा। अगले दिन वो दोनों मित्र आश्रम में गए। वहां जाते ही सबसे पहले संत के चरण स्पर्श किए फिर वहा बैठकर उनके उपदेश सुनने लगे। उपदेश पूर्ण होते ही प्रसादी शुरू होती हैं और दोनों मित्र  सबको प्रसादी ग्रहण करवाते हैं, फिर बाद में खुद प्रसाद ग्रहण करते हैं। संत यह सब देख रहे होते हैं उनका यह सेवा भाव देकर बहुत प्रसन्न होते हैं।  अब संत उन दोनों की परीक्षा लेने के लिए दोनो को बुलाके अपने पास बिठाते हैं। सबसे पहले मा...

गाँव का किसान भोला और उसके बैल | Village Farmer Bhola and His Bulls

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  एक बार की बात है जामपुर नामक गांव में भोला नाम का एक आदमी रहता था। वह खेती का कार्य करता था। उसके पास दो जोड़ी बैल थे। उनमें से एक का नाम कालू था और एक का बलू।  बैलों की मदद से ही भोला खेत जोता करता था। भोला खुद तो बहुत मेहनती था लेकिन उन दो बैलों में से बलू नाम का बैल बहुत कामचोर था । उस एक के कामचोर होने से खेत की जूताई अच्छे से नहीं हो पाती थी। भला कालू अकेला बेचारा क्या करता, बलू कामचोर होने के कारण वह हल चलाते समय  बिल्कुल भी मेहनत नहीं करता था सारा जोर कालू पर पड़ता था।  ज्यादा मेहनत करने से एक बार कालू बीमार हो गया। उस समय बारिश का मौसम भी था और खेत की जुताई भी करनी थी। कालू की स्थिति अभी तक ठीक नहीं हुई तो अब भोला ने बलू से ही खेत जोतने का निश्चय किया। अगले दिन भोला बलू को खेत ले गया और जूताई शुरू कर दी पर बलू बहुत कामचोर था वह जुताई सही से नहीं कर रहा था कल को सीधा चलाना था लेकिन वह बार-बार टेढ़ा-मेढ़ा घूम रहा था।  अब भोला ल जान गया की सारी मेहनत खेत में कालू ही करता था तभी वह इतना बीमार हो गया बलू तो बहुत कामचोर है। भोला अब बलू को सबक सिखाने के लिए ए...

कंजूस सेठ की करामात | kanjus seth ki karamat

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 एक गांव में एक जयचंद नाम का सेठ रहता था। गांव में उसकी एक किराणा की दुकान थी और वह दुकान बहुत अच्छी चलती थी। उस दुकान का मालिक जयचंद बहुत ही कंजूस था। गांव में किसी को भी कोई चीज या समान वस्तु उधार नहीं देता था। उस कंजूस सेठ के दुकान पर मोहन नाम का एक आदमी रहता था।उसको सेठ पगार भी कभी टाइम पर नहीं देता था। मोहन बहुत मेहनती था।दिन रात काम करता था फिर भी सेठ का स्वभाव ऐसा था की पैसे होते हुए भी वह टाइम पर नहीं देता था। जबकि दुकान बहुत अच्छी चलती थी।  एक दिन मोहन बहुत उदास घर पर बैठा था। तभी उसका एक दोस्त घर पर उससे मिलने आया। उसके दोस्त ने मोहन को उदास देखकर पूछा कि तुम इतना उदास क्यों बैठे हो सब ठीक तो है ना तभी मोहन ने जवाब दिया नहीं दोस्त मेरे बच्चों की फीस भरनी है स्कूल से टीचर के बहुत बार फोन आ चुके हैं। मेरे महीने की पगार भी बन गई लेकिन  मेरे सेठ ने अभी तक मुझे पगार नहीं दी है। जबकि मैंने सेठ को बहुत बार बोल दिया बच्चों की फीस भरनी है। काफी बार बोलने के बाद भी सेठ लापरवाह है अभी तक मुझे एक रुपया तक नहीं दिया। सेठ की दुकान बहुत अच्छी चलती है पैसे भी खूब आते हैं। ...

किसान और रहस्यमय मटका /Kishaan or rahsymay matka ki kahani

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 एक समय की बात है मगधपुर नामक गांव में एक मेहनती किसान रहता था। दिन रात सर्दी हो चाहें गर्मी हो अपने कार्य में लगा रहता था। उसकी इतनी मेहनत के बाद भी फसल शुरुआत में तो अच्छी होती थी लेकिन काफी बार मौसम खराब के कारण उसकी फसल नष्ट हो जाती थी। उसके परिवार में पांच सदस्य थे सबका भरण पोषण करना अब उसके लिए बहुत कठिन हो गया। घर पर उसकी पत्नी की तबीयत ठीक नहीं रहती थी। किस कारण वो कमाने के लिए शहर भी नहीं जा पा रहा था।उसके बच्चे भी छोटे थे जो उसके पत्नी की देखभाल नहीं कर पा रहे थे। समय के साथ-साथ उसकी पत्नी की तबीयत और खराब होने लग गई। पत्नी के इलाज के लिए अब उसके पास पैसे भी बहुत कम थे। अपनी मां की तबीयत खराब देखकर उसके छोटे-छोटे बच्चों ने भगवान से प्रार्थना की उसकी मां जल्द ठीक हो जाए। एक दिन शाम के समय किसान खेत में हल जोत रहा था  तभी हल जोतते समय उसका हल खेत के बीच में बहुत गहरा चला गया तभी हल आगे वाला हिस्सा कहीं फस गया। बेल अब आगे नहीं बढ़ पा रहे थे किसान ने बैलों को हल से अलग किया और फिर जमीन में फसे हल को निकालने के लिए वहां से फावड़ा से मिट्टी हटाना शुरू किया। काफी मीट्टी...

चार मित्र भूतिया जंगल/Horror story

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HORROR STORY  एक समय की बात है  एक भूतिया जादुई जंगल था उसमें से चार मित्र जा रहे थे काफी रात हो चुकी थी जंगल बड़ा डरावना था उन चारों को बहुत डर लग रहा था डर के मारे पसीना हो रहा था. अब वह करें तो क्या करें उनके पास उस जंगल निकलने का कोई दूसरा चारा नहीं था डर के मारे उन्हें पसीना हो रहा था पूरा बदन पसीने से भी चुका था चलते चलते उनको नकारात्मक ऊर्जा का एहसास हो रहा था इसी वजह से उन्हें और भी ज्यादा डर लगने लगा उसे तरह से जंगल से काफी आगे चलने पर उन्हें कुछ अजीब आवाज़ सुनाई देने लगी अब उनका डर और भी ज्यादा बढ़ गया उन्हें लग रहा है यहां कोई भूत प्रेत का साया है, चारों मित्र जल्दी-जल्दी आगे बढ़ने लगे उसे भूतिया जंगल में उन्हें एक बड़ा सा महल दिखाई दिया महल बहुत सुंदर था चारों मित्रों ने सोचा की रात भर के लिए उसे महल में वह विश्राम करेंगे इसलिए चारों मित्र उसे महल में जाने की योजना बनाते हैं, चारों मित्र महल की तरफ बढ़ते हैं जैसे ही वह महल में पहुंचते हैं, उनकी मेहमान नवाजी की जाती है, उनके रहने खाने पीने की अच्छी व्यवस्था की जाती है जब वह विश्राम करने के लिए अपने-अपने कक्ष में जात...

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